ISRO भूटान में अपना एक ग्राउंड स्टेशन बनाने वाला है। सामरिक तौर पर भारत के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है क्योंकि इसकी स्थिति भारत और चीन के बीच है। गौरतलब है कि भारत ने अपने पड़ोसी देशों को SAARC सेटेलाइट का तोहफा दिया है। GSAT-9 जिसे हम SAARC सैटेलाइट भी कहते हैं, 2017 में भारत द्वारा लांच किया गया था। भारत अपने पड़ोसी देशों में शिक्षा, संचार, शासन व्यवस्था और कृषि के क्षेत्र में सुधार के लिए सैटेलाइट की सहायता से मदद कर रहा है।

अफ़ग़ानिस्तान, बंगलादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका इस उपग्रह की सुविधाओं का लाभ लेने वाले देश हैं। ये उपग्रह शिक्षा, चिकित्सा, बैंकिंग और टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में जानकारियां साझा करेगा। इसमें एक रिमोट सेंसिंग आर्ट टेक्नोलॉजी उपकरण लगे हैं जो मौसम सम्बन्धी और भौगोलिक स्थितियों की जानकारी भी इन देशों के साथ साझा करेगें।

जानकार लोग इसे भारत की स्पेस-डिप्लोमेसी के तौर पर देख रहे हैं जो चीन का प्रभाव इस क्षेत्र में कम करने तौर पर इस्तेमाल की जा रही है। इसके अलावा भारत भूटान, नेपाल, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका में पांच बड़े ग्राउंड स्टेशन एवं 500 छोटे टर्मिनल्स स्थापित करने वाला है। ये स्टेशन और टर्मिनल्स इस उपग्रह का इस्तेमाल करने के लिए प्रयुक्त होंगे। इसके अलावा ISRO इन स्टेशनों का इस्तेमाल अपने और भी उपग्रहों के लिए भी कर सकता है। भारत का भूटान में स्टेशन बनाना चीन के तिब्बत में स्थित सैटेलाइट ट्रैकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत की चाल के तौर पर देखा जा रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ने एक एडवांस सैटेलाइट ट्रैकिंग सेंटर एंड एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्ज़र्वेटरी तिब्बत में भारत-चीन सीमा से महज 125 किलोमीटर दूरी पर बना रखी है। हालांकि ये फैसिलिटी इतनी उन्नत है कि ये भारत की सैटेलाइट को धोखा भी दे सकती है क्योंकि चीन ने पहले भी एन्टी-सैटेलाइट तकनीकी का प्रदर्शन दुनियां के सामने किया है। चीन ने दो एन्टी-सैटेलाइट मिसाइल SC-19 और लार्जर DN-2 11 जनवरी, 2007 को टेस्ट की थीं।