उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुंभ का आयोजन किया गया है। 50 दिनों तक चलने वाले इस कुंभ में लाखों करोड़ों लोगों के जुटने की संभावना है। आस्था के इस कुंभ में सिर्फ देश भी नहीं, बल्कि विदेशों से भी बहुत तादा में दूसरे धर्मों को मानने वाले लोग शामिल होते हैं।

इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके आयोजन के लिए विशेष व्यवस्था की है। राज्य सरकार हर छोटी से छोटी बातों का ख्याल रख रही है। श्रध्दालुओं की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था, आदि का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इस कुंभ में सबसे खास बात यह है कि लोगों की सुरक्षा के लिए स्वयंसेवकों की स्पेशल फोर्स गंगा टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस फोर्स का प्रशिक्षण रक्षा मंत्रालय की देखरेख में हुआ है।

क्या है गंगा टास्क फोर्स?

यह प्रादेशिक सेना का एक हिस्सा है। प्रादेशिक सेना, नियमित सेना का एक हिस्सा है। 1948 में प्रादेशिक सेना अधिनियम पारित होने के बाद इसे स्थापित किया गया था। इसे 2014 में एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से बनाया गया। गंगा संरक्षण के लिए, सरकार एक नया मसौदा विधेयक लेकर आई। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय ने एक विधेयक तैयार किया विधेयक, जिसके तहत इस फोर्स की स्थापना की गई है। यह फोर्स लोगों को गंगा और इसकी सहयोगी नदियों को प्रदूषित करने से रोकेगी और प्रदुषित करने पर गिरफ्तार करेगी।

फोर्स की मुख्य बातें-

1. इस फोर्स में 100-100 पुरुषों की तीन कंपनियां होंगी, जो कानपुर, वाराणसी तथा प्रयागराज में रहेंगी एवं इसका मुख्यालय प्रयागराज में होगा।
2. यह रक्षा मंत्रालय के अनुमोदन के साथ गठित है। नदी के स्वास्थ्य को मापने के लिए उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी प्रशिक्षित किया गया है।

फोर्स के मुख्य कार्य-

1. कुंभ मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन।
2. नदी को स्वच्छ रखने के लिए जागरूकता फैलाना।
3. लोगों और उद्योगों को नदी प्रदूषित करने से रोकना।
4. क्षेत्र में बाढ़ या प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों की सहायता करना।
5. मिट्टी कि कटाव रोकने के लिए पेड़ लगाना।
6. जैव विविधता संरक्षण के लिए संवेदनशील नदी क्षेत्रों में गश्त करना।

बिल के महत्वपूर्ण भाग

बिल में राष्ट्रीय गंगा परिषद और राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण द्वारा कानून लागू करने तथा गंगा नदी का संरक्षण करने के लिए कहा गया है। इस विधेयक में जिन कार्यों को संज्ञेय अपराध बनाया गया है, वो हैं-  (i) निर्माण गतिविधियाँ, जिससे नदी में अवरोध पैदा हो, (ii) गंगा तथा इसकी सहयोगी नदियों से औद्योगिक और व्यवसायिक उपभोग के लिए भूजल की निकासी करना, (iii) मछली पकड़ना, (iV) अनुपचारित तथा उपचारित पदार्थ का निर्वहन।

गंगा संरक्षण वाहिनी

1. मसौदा विधेयक में केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों के गठन और रखरखाव के रूप में GPC की परिकल्पना की गई है।
2. यह विधेयक सशस्त्र GPC कर्मियों को किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति देता है, जिसने इस अधिनियम के तहत अपराध किया है और ऐसे व्यक्ति को निकटतम पुलिस थाने में हिरासत में लिया जा सकता है।
3. इसके लिए GPC, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) का पालन करेगा। GPC कर्मियों को गृह मंत्रालय द्वारा नियंत्रण किया जाएगा और राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण द्वारा तैनात किया जाएगा। यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के समान ही प्रावधान है, लेकिन GPC का निर्माण नया है।

क्या होगी सजा?

1. मसौदा विधेयक में गंगा और इसके सहायक नदियों में व्यवसायिक कार्य, मछली पकड़ने या जल संबंधित गतिविधियों के लिए 2 साल की कैद या ₹2 लाख के अर्थदंड या दोनों का प्रावधान है।
2. इसी प्रकार, गंगा नदी के सक्रिय बाढ़ मैदान में आवासीय और औद्योगिक प्रयोजनों के स्थायी निर्माण के लिए 2 वर्ष तक की कारावास या ₹50 लाख का अर्थदंड या दोनों हो सकता है।
3. यदि कोई व्यक्ति या नगर पालिका/नगर निगम गंगा नदी के किनारे आवासीय या औद्योगिक या वाणिज्यिक परिसर का निर्माण करता है, जिससे नदी को खतरा हो। उसे 5 वर्ष तक की जेल या प्रतिदिन ₹50 हजार रुपये अर्थदंड या दोनों हो सकता है।

विधेयक की पृष्ठभूमि

सरकार ने जुलाई, 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय के नेतृत्व में समिति का गठन किया था।
इस समिति ने 2017 में ‘राष्ट्रीय गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) विधेयक’ नाम का ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपा था।

Report By: Shivang Tiwari