आज भारत की महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर सबसे बड़ा खतरा बन के उभर रहा है। अगर डेटा पर यकीन करें तो हर 22 में से एक महिला में स्तन कैंसर की संभावना विकसित हो सकती है। यह बेहद अफसोस और दुख की बात है कि स्तन कैंसर से पीड़ित दो महिलाओं में से एक की मृत्यु हो जाती है। दुनियाभर के विपरीत भारत में काफी कम उम्र की महिलाएं स्तन कैंसर की बीमारी से पीड़ित हैं।

कैंसर का बेहतरीन इलाज और देखभाल उपलब्ध है लेकिन अभी भी अच्छे परिणाम के लिए बीमारी की शुरुआत में ही पहचान होना जरूरी है। अफसोस की बात है कि इस बीमारी के बारे में लोगों में बहुत कम जागरूकता है। इसके परिणामस्वरूप बीमारी का पता अक्सर उस समय लगता है, जब इलाज के विकल्प अधिक सीमित होते हैं। दूसरे इस बीमारी का पता लगाने वाला मैमोग्राम टेस्ट लागत काफी ज्यादा 1,500 से 8,000 रुपये के बीच होती है। जो हर किसी के लिए मुमकिन नही है।

इन वजहों ने केरल के साइंटिस्टों के एक ग्रुप को एक ऐसी ब्रा का आविष्कार करने के लिए प्रेरित किया, जो ब्रेस्ट में कैंसर की कोशिकाओं का पता लगाने में मदद कर सकता है। सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (C-MET) की त्रिशूर शाखा की एक टीम ने अपने मुख्य जांच अधिकारी के रूप में डॉ. ए सीमा के नेतृत्व में, वियरेबल डिवाइस का आविष्कार किया जो सेंसर से लैस है। यह कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने के लिए थर्मल इमेजिंग का उपयोग करता है।

यह ब्रा थर्मल इमेजिंग की सहायता से कैंसर सेल्स का पता लगाती है

मालाबार कैंसर सेंटर कन्नूर के सहयोग से इस अनोखे ब्रा को विकसित करने में पूरी टीम लगी और चार साल में कई सारे ट्रायल्स के बाद इसे संभव कर दिखाया गया। डॉ. सीमा कहती हैं कि इस ब्रा में लगे सेंसर त्वचा का तापमान मापते हैं और स्तन में किसी भी तरह के दबाव का भी पता लगाते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें मैमोग्राम टेस्ट की तरह कोई रेडिएशन या दर्द नहीं होता है। यह डिवाइस इतनी पोर्टेबल बनाई गई है कि गांव की आशा वर्कर भी इसे फील्ड विजिट के दौरान अपने साथ ले जा सकती हैं।

डॉक्टर सीमा की टीम

डॉ. सीमा को उनके इस योगदान के लिए नारी शक्ति पुरस्कार के अलावा पिछले साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। इस डिवाइस की लागत 400-500 रुपये के बीच रहने की उम्मीद है। प्रोडक्शन बढ़ने के बाद लागत में और कमी हो सकती है। स्तन कैंसर का जल्द पता नहीं लगने और इलाज नहीं होने पर यह गंभीर और जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे डिवाइस इस घातक बीमारी से लड़ने की दिशा में एक बेहतरीन कदम हैं।

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