राजस्थान के बांसवाड़ा शहर के पास निचला घंटाला गांव की रहने वाली तुलसी के संघर्ष की दास्तान देश की सभी महिलाओं के लिए मिसाल बन गयी। विपरीत परिस्थितियों में जब उनका परिवार आर्थिक संकट से घिरा तो उन्होंने हिम्मत नही हारी। तुलसी ऑटो की सीट पर बैठी और दस दिन में ही कुशलता से ऑटो चलाना सीख लिया। अब वह करीब दो वर्ष से परिवार के लिए आजीविका कमा रही है।

छोटी-छोटी मुसीबतों से घबरा जाने वाले लोगो के लिए तुलसी एक मिसाल है। तुलसी के पति ऑटो चलाते थे, करीब दो वर्ष पहले दुर्घटना में पति का पैर फ्रेक्चर हो गया। काफी इलाज कराया गया, लेकिन वे ठीक से चल-फिरने की स्थिति में नहीं रहे। इससे आर्थिक संकट के चलते दो वक्त की रोटी भी मुश्किल हो गई। तब तुलसी ने खुद ऑटो चलाने की ठानी।

तुलसी बचपन में साइकिल चलाया करती थी लेकिन ऑटो चलाने में उन्हें एक डर था। फिर जैसे-तैसे अभ्यास कर आगे बढ़ी, मुश्किल आसान होती गई। अब वह मुख्य रूप से गायों के लिए गांव से घास लाती हैं और शहर में घरों तक पहुंचाकर परिवार पाल रही है। आज वह आत्मनिर्भर है और एक पुत्र व दो पुत्रियों का घर चला रही है।

तुलसी की इस हिम्मत पर महावीर इंटरनेशनल माही वीरा केन्द्र मददगार बना। उसका आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ जरुरत पर मार्गदर्शन किया, तो तुलसी के पीछे मुडकऱ नहीं देखा और अब वह सफल ऑटो चालक बन गई है। तुलसी की इस उपलब्धि पर शनिवार को केन्द्र की महिलाओं ने उसका सम्मान किया। बताया कि तुलसी मुख्य रूप से घरों तक गोमाता के लिए घास पहुंचाने का कार्य करती है, तुलसी ने गजब का साहस दिखाया और अपनी सभी मुश्किलों से डटकर मुकाबला किया।